Sunday, October 11, 2020

What Matters (Hinglish)

वो वक़्त बढ़िया था जब T.V और Phone होते न थे , 

Atleast लोग जहाँ होते , असली में वही होते तो थे|


आज तन कहीं और मन कहीं होता है ,

Present में जीना क्या है ? 

मुश्किल सा प्रतीत होता है |


दो पल का जीवन यहाँ , 

प्यारे , दो पल का जीवन |


Technologies,Globalization अच्छी लग भी जाएँ,  

पर atlast 'हरि' का भजन कितना हुआ  ? 

matter करता इतना ही है |  






Wednesday, September 30, 2020

Identity




सागर की एक लहर से पूछा मेने 

तुम उथल पुथल इतना होती हो ,
क्षणभंगुर का जीवन तुम्हारा ,
कैसा लगता है ?
कोई Identity खुद की भी होनी चाहिए न तुम्हारी ?

लहर ने कहा 

 तुमने देखा मुझे किनारे पर जब समुन्द्र से अलग होने को थी ,
देखना था मुझे उस गहराई में , जहा मैं गहरा समुन्द्र ही थी ,
आकाश की विशालता को बादल में समेट सकते हो कैसे ?

 

सागर की करवटो को लहरों  की Identity दे सकते हो कैसे ?
जहा से उठी , वही पे रम गयी , वो ही थी और हु भी वही |

                                                    -Kanika



 

Monday, May 25, 2020

संघर्ष

संघर्षो से जुड़ा यह जीवन , 

कर्मों के बाणों से बनता बिगड़ता यह जीवन |

एक एक पल में बिखरती मान्यताएं सभी ,

मुक्त जीव तभी जब अहम् टूट जाएँ सभी |

समय की चाल बदले हर दिन यहाँ ,किसी चाल में सेनापति,

अगली ही चाल में शत्रु बने ||

 

डर नहीं संघर्ष से,निर्भयता ही मेरी पहचान है ,पर असमंजस की लहरों में डोलता यह जीवन |

कहाँ खड़े ,क्यों खड़े , किधर ले जा रहे हमें |

न ज्ञान है , न राह है , प्रभु बस एक तुम्हारी आस है ||


कश्ती मेरी ,सागर तेरा ,आस मेरी पर कृपा तुम्हारी है |

क्या पाउ कृपा बिना , जब तुम ही आधार और यह सृष्टि भी तुम्हारी है ||

 

निशब्द हूँ प्रभु , शब्दों में क्या बताऊँ तुम्हे |

सादगी से तुम मिलो ,नहीं छल कपट से ,सादगी कैसे मिले इस कलिकाल के ललाट पे |


कुशलता नहीं है मुझमें ,न मेरे व्यव्हार में ,अनजाने में रोज़ भूलें करते है संसार में |

इसी प्रतीक्षा में यूँ दिन ,काल बीत रहे ,कब मिलोगे कैसे मिलोगे, प्रशन्नो  में  सभी  उलझ रहे ||