Wednesday, September 30, 2020

Identity




सागर की एक लहर से पूछा मेने 

तुम उथल पुथल इतना होती हो ,
क्षणभंगुर का जीवन तुम्हारा ,
कैसा लगता है ?
कोई Identity खुद की भी होनी चाहिए न तुम्हारी ?

लहर ने कहा 

 तुमने देखा मुझे किनारे पर जब समुन्द्र से अलग होने को थी ,
देखना था मुझे उस गहराई में , जहा मैं गहरा समुन्द्र ही थी ,
आकाश की विशालता को बादल में समेट सकते हो कैसे ?

 

सागर की करवटो को लहरों  की Identity दे सकते हो कैसे ?
जहा से उठी , वही पे रम गयी , वो ही थी और हु भी वही |

                                                    -Kanika