वो वक़्त बढ़िया था जब T.V और Phone होते न थे ,
Atleast लोग जहाँ होते , असली में वही होते तो थे|
आज तन कहीं और मन कहीं होता है ,
Present में जीना क्या है ?
मुश्किल सा प्रतीत होता है |
दो पल का जीवन यहाँ ,
प्यारे , दो पल का जीवन |
Technologies,Globalization अच्छी लग भी जाएँ,
पर atlast 'हरि' का भजन कितना हुआ ?
matter करता इतना ही है |

No comments:
Post a Comment