जो है सो तुझ में ,
तुझमें सो ही मुझमें ,
जो है नहीं , सो बिसरे ,
जो है , हर पल सो बरसे |
न सफर कहीं ,
मंज़िल भी नहीं ,
किसे पार पाने की मज़दूरी ?
नदी नाव किनारा , जब एक ही |
न चाह कोई है , न पुकार कोई है ,
जब पूरा आधार , पूरा आकाश यहीं है |
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