Sunday, March 8, 2026

Shakti - शक्ति

 



नारी शक्ति स्नेह , संवेदना , पोषण, मातृत्व , शीलता और आत्म शक्ति की सुनहरी खान  है ,

तो पुरुषत्व साहस ,स्थिरता ,संयम , सुरक्षा , अस्तित्व ,तर्क और विजय का उद्गम स्थान है |

दौड़ इस बात की न हो ,

की समाज पुरुष प्रधान है या स्त्री प्रधान ,

विचार इस बात का हो ,

की पुरुषत्व और नारी शक्ति क्या हर मानव में हो सकती हैं एक समान ?


जो देह मिली पुरुष की तो क्या पुरुषत्व का सम्मान हम कर पाए ?

जो देह मिली नारी की तो क्या शक्ति को सम्मान हम दे पाए ?


कहतें हैं उपनिषद , गीता यही |

समझना स्वयं को देह केवल , मानव का परम लक्ष्य नहीं |

खोजे स्वयं को जो पाए , शिव शक्ति में भेद नहीं ,

फिर दौड़ कहाँ , अंतर भी कहाँ , जब सब एक वही ||

मान्यताओं और कल्पनाओ के ढेर से सृष्टि सजी ,

हटें कल्पनाओं के बादल जब , निर्दोष प्रेम की ही बंसी सुनी |