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Thursday, November 14, 2024

अनुभव


शोर में जिंदगी ,
और एकांत में ज़िन्दगी |
बड़ा फर्क होता है ,
एक में हल्ला गुल्ला ,
तो दुसरे में सन्नाटा होता है |
कोनसी बेहतर ,
यह तो अपने mood पर ही निर्भर होता है |
कभी अकेलापन ही सब दे जाए,
और कभी भीड़ भाड़ में भी खालीपन सा लगता है |
पर गहराई से सोचूं तो ,
दोनों जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं ,
क्यूंकि समता की परख तो,
इन दोनों परिस्थितियों में ही  होती है  |
वैसे तो हाथ में हमारे कुछ नहीं,
सब भगवान् जी की लीला होती है |
पर इस लीला की स्पष्टता भी, 
अंतर्मन के अनुभव से ही होती है |
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