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Friday, November 24, 2023

Ek main aur Ek Tum













एक मैं हूँ , जो अक्सर  दुनिया में खो जाती हूँ ,

एक तुम हो , जो रौशनी बन फिर मुझे जगाते हो |


एक मैं हूँ , जो प्यार के दो शब्द भी नहीं जानती , 

और एक तुम , जो सदिओं से प्रेम की डोर में जाने कितनो को बांधे हो |


एक मैं , कोयले की खान  ,

एक तुम , अनमोल  हीरों के बागान |


एक मालिक , और एक दास , फिर भी मिलने की आस |

मन की शीतल छाया में  करके वास  ,ह्रदय के सूरज में करते हो महारास |


एक तुम जो  अनंत जीवों  का प्रति क्षण पालन करते हो ,

एक मैं जो धन्यवाद दूँ , यह भी याद न रख पाती हूँ |


एक मैं हूँ  जो दुनिया की दौड़ धुप  में न जाने कितनी बार लड़खलाती हूँ |

एक तुम , जो हर बार 'उठ प्यारे ' यूँ कहकर ,  फिर चलाते हो  |



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Thursday, February 24, 2022

एक किस्सा पत्र का |


                                            

इक वृक्ष  पर लगा  पत्र  ,जो  zameen पर आ गिरा |

हरा भरा जो था , अब वैसा कहाँ रहा ||


हवा  के  संग  जो  चला , वो  इधर  उधर  अकेला  सा |

सोचा  था  रहूँगा  हरा  ,पर  धीरे  धीरे  सुकड़  सा  गया | |


याद  आयी  उसे  अपने  वृक्ष  की , जहाँ  वो  लहलहाता  सा  था |

हर  धुप  में  हर  बारिश  में  उसीके  संग  खिलता  सा  था ||


दुनिया  की  दौड़  में  , saadgi खो  बैठा  था ,

किसी  ज़िद्द  के  पीछे , jatil बना  बैठा  था | 


एक समय आया  ,जब  उसको  kahin Ehsaas यह   हुआ , 

हस्ती  न  थी  कुछ उसकी,  वो  समझ  यह  गया |

मिटटी  से  बना  मिटटी  में  मिला ,

और ..मिटटी  ही होके अपने  वृक्ष  से  जा  मिला ||


Mauj  में  रहता  है  वो  अब , 

बारिश  में  महकता  सा है अब | 

हर  हाल  में  सम सा  रहता  है ,

वो  पत्र  पूर्णता का अनुभव करता है अब ||