Thursday, November 14, 2024

अनुभव


शोर में जिंदगी ,
और एकांत में ज़िन्दगी |
बड़ा फर्क होता है ,
एक में हल्ला गुल्ला ,
तो दुसरे में सन्नाटा होता है |
कोनसी बेहतर ,
यह तो अपने mood पर ही निर्भर होता है |
कभी अकेलापन ही सब दे जाए,
और कभी भीड़ भाड़ में भी खालीपन सा लगता है |
पर गहराई से सोचूं तो ,
दोनों जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं ,
क्यूंकि समता की परख तो,
इन दोनों परिस्थितियों में ही  होती है  |
वैसे तो हाथ में हमारे कुछ नहीं,
सब भगवान् जी की लीला होती है |
पर इस लीला की स्पष्टता भी, 
अंतर्मन के अनुभव से ही होती है |
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Friday, November 24, 2023

Ek main aur Ek Tum













एक मैं हूँ , जो अक्सर  दुनिया में खो जाती हूँ ,

एक तुम हो , जो रौशनी बन फिर मुझे जगाते हो |


एक मैं हूँ , जो प्यार के दो शब्द भी नहीं जानती , 

और एक तुम , जो सदिओं से प्रेम की डोर में जाने कितनो को बांधे हो |


एक मैं , कोयले की खान  ,

एक तुम , अनमोल  हीरों के बागान |


एक मालिक , और एक दास , फिर भी मिलने की आस |

मन की शीतल छाया में  करके वास  ,ह्रदय के सूरज में करते हो महारास |


एक तुम जो  अनंत जीवों  का प्रति क्षण पालन करते हो ,

एक मैं जो धन्यवाद दूँ , यह भी याद न रख पाती हूँ |


एक मैं हूँ  जो दुनिया की दौड़ धुप  में न जाने कितनी बार लड़खलाती हूँ |

एक तुम , जो हर बार 'उठ प्यारे ' यूँ कहकर ,  फिर चलाते हो  |



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Thursday, February 24, 2022

एक किस्सा पत्र का |


                                            

इक वृक्ष  पर लगा  पत्र  ,जो  zameen पर आ गिरा |

हरा भरा जो था , अब वैसा कहाँ रहा ||


हवा  के  संग  जो  चला , वो  इधर  उधर  अकेला  सा |

सोचा  था  रहूँगा  हरा  ,पर  धीरे  धीरे  सुकड़  सा  गया | |


याद  आयी  उसे  अपने  वृक्ष  की , जहाँ  वो  लहलहाता  सा  था |

हर  धुप  में  हर  बारिश  में  उसीके  संग  खिलता  सा  था ||


दुनिया  की  दौड़  में  , saadgi खो  बैठा  था ,

किसी  ज़िद्द  के  पीछे , jatil बना  बैठा  था | 


एक समय आया  ,जब  उसको  kahin Ehsaas यह   हुआ , 

हस्ती  न  थी  कुछ उसकी,  वो  समझ  यह  गया |

मिटटी  से  बना  मिटटी  में  मिला ,

और ..मिटटी  ही होके अपने  वृक्ष  से  जा  मिला ||


Mauj  में  रहता  है  वो  अब , 

बारिश  में  महकता  सा है अब | 

हर  हाल  में  सम सा  रहता  है ,

वो  पत्र  पूर्णता का अनुभव करता है अब ||

 


Sunday, October 11, 2020

What Matters (Hinglish)

वो वक़्त बढ़िया था जब T.V और Phone होते न थे , 

Atleast लोग जहाँ होते , असली में वही होते तो थे|


आज तन कहीं और मन कहीं होता है ,

Present में जीना क्या है ? 

मुश्किल सा प्रतीत होता है |


दो पल का जीवन यहाँ , 

प्यारे , दो पल का जीवन |


Technologies,Globalization अच्छी लग भी जाएँ,  

पर atlast 'हरि' का भजन कितना हुआ  ? 

matter करता इतना ही है |  






Wednesday, September 30, 2020

Identity




सागर की एक लहर से पूछा मेने 

तुम उथल पुथल इतना होती हो ,
क्षणभंगुर का जीवन तुम्हारा ,
कैसा लगता है ?
कोई Identity खुद की भी होनी चाहिए न तुम्हारी ?

लहर ने कहा 

 तुमने देखा मुझे किनारे पर जब समुन्द्र से अलग होने को थी ,
देखना था मुझे उस गहराई में , जहा मैं गहरा समुन्द्र ही थी ,
आकाश की विशालता को बादल में समेट सकते हो कैसे ?

 

सागर की करवटो को लहरों  की Identity दे सकते हो कैसे ?
जहा से उठी , वही पे रम गयी , वो ही थी और हु भी वही |

                                                    -Kanika



 

Monday, May 25, 2020

संघर्ष

संघर्षो से जुड़ा यह जीवन , 

कर्मों के बाणों से बनता बिगड़ता यह जीवन |

एक एक पल में बिखरती मान्यताएं सभी ,

मुक्त जीव तभी जब अहम् टूट जाएँ सभी |

समय की चाल बदले हर दिन यहाँ ,किसी चाल में सेनापति,

अगली ही चाल में शत्रु बने ||

 

डर नहीं संघर्ष से,निर्भयता ही मेरी पहचान है ,पर असमंजस की लहरों में डोलता यह जीवन |

कहाँ खड़े ,क्यों खड़े , किधर ले जा रहे हमें |

न ज्ञान है , न राह है , प्रभु बस एक तुम्हारी आस है ||


कश्ती मेरी ,सागर तेरा ,आस मेरी पर कृपा तुम्हारी है |

क्या पाउ कृपा बिना , जब तुम ही आधार और यह सृष्टि भी तुम्हारी है ||

 

निशब्द हूँ प्रभु , शब्दों में क्या बताऊँ तुम्हे |

सादगी से तुम मिलो ,नहीं छल कपट से ,सादगी कैसे मिले इस कलिकाल के ललाट पे |


कुशलता नहीं है मुझमें ,न मेरे व्यव्हार में ,अनजाने में रोज़ भूलें करते है संसार में |

इसी प्रतीक्षा में यूँ दिन ,काल बीत रहे ,कब मिलोगे कैसे मिलोगे, प्रशन्नो  में  सभी  उलझ रहे ||





Monday, September 8, 2014

Nature- the Inspiration within


It’s a winter Morning they say,
was holidaying on the most awaited Sunday ..

I woke up at seven,
thinking why last night, I only slept at eleven..

I stood at the balcony, felt delightful when cold wind touched me,
 Beautiful sun rays had just began to fall on me.
I wondered for the nature blissful ,
Laid on chair watching the peaceful.

I heard few harmonious chants ,
felt it alike the innocent smiling infants.

Birds chirping sounded like wonderful backdrop music,
I folded my hands in a deep breath to listen the most rhythmic.

I relished while the Cold breeze touched my feet,
At the other, sunshine had my heed.
It was the most amazing combination which was naturally too neat.

I wondered the  role model as the beautiful nature,
It gives humans the most happiest, heartily and harmonious flavor.
Smiled with  amorphous natural touch.
It inspired me to live, let live, laugh & enjoy all the moments as much.

Just a thought where no hatred lies, I wondered where I could find,
A learned voice followed , "Introspect the true inner self -the most kind" .